बालकाण्ड · दोहा 72 · दोहा/सोरठा
सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि।
सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि।
सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि।।72।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.72 · पुस्तक पृ. 89, 89
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि।
माँ, सुनो; मैंने ऐसा स्वप्न देखा है, जिसे तुम्हें सुनाती हूँ।
English explanation
Listen, Mother: I saw a dream like this, which I shall tell you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहि | सुनो | listen |
| मातु | हे माँ | Mother |
| मैं | मैंने | I |
| दीख | देखा | saw |
| अस | ऐसा | such |
| सपन | स्वप्न | a dream |
| सुनावउँ | सुनाती हूँ | I shall recount |
| तोहि | तुम्हें | to you |
2 सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि।।72।।
एक सुंदर, गौरवर्ण, श्रेष्ठ ब्राह्मण ने मुझे ऐसा उपदेश दिया।
English explanation
A handsome, fair-complexioned, excellent Brahmin gave me this counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | handsome |
| गौर | गौरवर्ण | fair-complexioned |
| सुबिप्रबर | उत्तम श्रेष्ठ ब्राह्मण | an excellent Brahmin |
| अस | ऐसा | thus |
| उपदेसेउ | उपदेश दिया | gave counsel |
| मोहि | मुझे | to me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 72
- स्रोत अभिलेख
- 1.72
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 89, 89
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