बालकाण्ड · दोहा 71 · दोहा/सोरठा
प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान।
प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान।
पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान।।71।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.71 · पुस्तक पृ. 88, 89
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान।
प्रिय, सारी चिंता छोड़ दो और श्रीभगवान का स्मरण करो।
English explanation
Beloved, give up all anxiety and remember the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रिया | हे प्रिय | beloved |
| सोचु | चिंता | anxiety |
| परिहरहु | छोड़ दो | give up |
| सबु | सारी | all |
| सुमिरहु | स्मरण करो | remember |
| श्रीभगवान | श्रीभगवान को | the revered Lord |
2 पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान।।71।।
जिसने पार्वती को रचा है, वही उनका कल्याण करेगा।
English explanation
The one who created Parvati will himself ensure her well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पारबतिहि | पार्वती को | Parvati |
| निरमयउ | रचा | created |
| जेहिं | जिसने | the one who |
| सोइ | वही | that very one |
| करिहि | करेगा | will bring about |
| कल्यान | कल्याण | well-being |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 71
- स्रोत अभिलेख
- 1.71
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 88, 89
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