बालकाण्ड · दोहा 78 · दोहा
सुनत बचन बिहसे रिषय गिरिसंभव तव देह।
सुनत बचन बिहसे रिषय गिरिसंभव तव देह।
नारद कर उपदेसु सुनि कहहु बसेउ किसु गेह॥ ७८॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.78 · पुस्तक पृ. 94, 94
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनत बचन बिहसे रिषय गिरिसंभव तव देह।
एआई-प्रारूप: वचन सुनकर ऋषि हँसे और बोले, “तुम्हारी देह पर्वत से उत्पन्न है।”
English explanation
AI draft: Hearing her words, the sages laughed and said, “Your body is born of a mountain.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बचन | वचन; पार्वती की बात | words; what Parvati said |
| बिहसे | हँसे | laughed |
| रिषय | ऋषि; यहाँ सप्तर्षि | the sages; here, the seven sages |
| गिरिसंभव | पर्वत से उत्पन्न | born of a mountain |
| तव | तुम्हारी | your |
| देह | देह; शरीर | body |
2नारद कर उपदेसु सुनि कहहु बसेउ किसु गेह॥ ७८॥
नारद का उपदेश सुनकर किसका घर बसा है, बताओ?
English explanation
Tell us, whose household has prospered by heeding Narada’s advice?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| कर | का | of; possessive marker |
| उपदेसु | उपदेश; सलाह | teaching; advice |
| सुनि | सुनकर; मानकर | having heard; having heeded |
| कहहु | बताओ | tell us |
| बसेउ | बसा; आबाद हुआ | became settled; prospered |
| किसु | किसका | whose |
| गेह | घर; गृहस्थी | home; household |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 78
- स्रोत अभिलेख
- 1.78
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 94, 94
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