बालकाण्ड · दोहा 77 · दोहा/सोरठा
पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु।
पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु।
गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु।।77।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.77 · पुस्तक पृ. 93, 93
भावार्थ और शब्दार्थ
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1पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु।
तुम लोग पार्वती के पास जाकर उनके प्रेम की परीक्षा लो।
English explanation
Go to Parvati and test her love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पारबती | पार्वती के | Parvati, daughter of the mountain king |
| पहिं | पास | to |
| जाइ | जाकर | having gone |
| तुम्ह | तुम लोग | you all |
| प्रेम | प्रेम की | love |
| परिच्छा | परीक्षा | test |
| लेहु | लो | conduct; undertake |
2 गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु।।77।।
पर्वतराज को प्रेरित करके पार्वती को घर भेजवाओ और उनका संदेह दूर करो।
English explanation
Persuade the mountain king to have Parvati sent home, and dispel her doubt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरिहि | पर्वतराज हिमवान को | the mountain king Himavan |
| प्रेरि | प्रेरित करके | having urged |
| पठएहु | भेजवाओ | have her sent |
| भवन | घर | home |
| दूरि | दूर | away |
| करेहु | करो | make; remove |
| संदेहु | संदेह | doubt |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 77
- स्रोत अभिलेख
- 1.77
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका शिवजीसे विवाहके लिये अनुरोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 93, 93
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