बालकाण्ड · दोहा 79 · दोहा/सोरठा
अब सुख सोवत सोचु नहि भीख मागि भव खाहिं।
अब सुख सोवत सोचु नहि भीख मागि भव खाहिं।
सहज एकाकिन्ह के भवन कबहुँ कि नारि खटाहिं।।79।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.79 · पुस्तक पृ. 94, 95
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अब सुख सोवत सोचु नहि भीख मागि भव खाहिं।
अब शिव सुख से सोते हैं, कोई चिंता नहीं; भीख माँगकर खाते हैं।
English explanation
Now Shiva sleeps comfortably, without a care, and eats by begging.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सुख | सुख से | comfortably |
| सोवत | सोते हैं | sleeps |
| सोचु | चिंता | worry |
| नहि | नहीं | none; not |
| भीख | भिक्षा | alms |
| मागि | माँगकर | having begged for |
| भव | शिव | Shiva |
| खाहिं | खाते हैं | eats |
2 सहज एकाकिन्ह के भवन कबहुँ कि नारि खटाहिं।।79।।
जो स्वभाव से अकेले रहने वाले हैं, उनके घर में भला स्त्रियाँ कभी निभ सकती हैं?
English explanation
Can women ever fit into the household of one who is solitary by nature?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| एकाकिन्ह | अकेले रहने वालों | those who live alone |
| के | के | of |
| भवन | घर में | in the household |
| कबहुँ | कभी | ever |
| कि | क्या भला | can … really? |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| खटाहिं | निभ सकती हैं; अनुकूल रह सकती हैं | can fit in; live compatibly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 79
- स्रोत अभिलेख
- 1.79
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 94, 95
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