बालकाण्ड · दोहा 80 · दोहा/सोरठा
महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम।
महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम।
जेहि कर मनु रम जाहि सन तेहि तेही सन काम।।80।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.8 · पुस्तक पृ. 95, 96
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम।
मान लिया कि महादेव अवगुणों के घर हैं और विष्णु सभी गुणों के धाम हैं।
English explanation
Granted that Shiva is a house of faults and Vishnu the abode of all virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महादेव | महादेव; शिव | Mahadeva, Shiva |
| अवगुन | अवगुणों का | of faults |
| भवन | घर; आश्रय | house; abode |
| बिष्नु | भगवान विष्णु | Vishnu |
| सकल | सभी | all |
| गुन | गुणों का | of virtues |
| धाम | धाम; भंडार | abode; repository |
2 जेहि कर मनु रम जाहि सन तेहि तेही सन काम।।80।।
जिसका मन जिससे रम गया है, उसका प्रयोजन उसी से है।
English explanation
Whoever's heart delights in someone has concern with that person alone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिसका | whose; whoever's |
| कर | का | of; possessive marker |
| मनु | मन | heart; mind |
| रम | रमता है; अनुरक्त है | delights; is attached |
| जाहि | जिससे; जिस व्यक्ति | whom; the person whom |
| सन | से; के साथ | with |
| तेहि | उसे; उस व्यक्ति को | to that person |
| तेही | उसी | that very person alone |
| सन | से | with |
| काम | प्रयोजन; सरोकार | concern; purpose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 80
- स्रोत अभिलेख
- 1.8
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 95, 96
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