बालकाण्ड · दोहा 81 · दोहा/सोरठा
तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु।
तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु।
नाइ चरन सिर मुनि चले पुनि पुनि हरषत गातु।।81।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.81 · पुस्तक पृ. 96, 96
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु।
आप माया हैं और शिव भगवान हैं; आप दोनों समस्त जगत के माता-पिता हैं।
English explanation
You are Maya, and Shiva is the Lord; together you are the mother and father of the entire world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| माया | माया; दिव्य सृष्टिशक्ति | Maya, divine creative power |
| भगवान | भगवान | the Lord |
| सिव | शिव | Shiva |
| सकल | समस्त | entire |
| जगत | जगत के | of the world |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
2 नाइ चरन सिर मुनि चले पुनि पुनि हरषत गातु।।81।।
चरणों में सिर झुकाकर मुनि चले गए; उनका शरीर बार-बार हर्ष से पुलकित होता था।
English explanation
Bowing their heads at her feet, the sages departed, their bodies repeatedly thrilling with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| चरन | चरणों में | at her feet |
| सिर | सिर | their heads |
| मुनि | मुनि | the sages |
| चले | चले गए | departed |
| पुनि | बार | again |
| पुनि | बार | and again |
| हरषत | हर्षित होता | thrilling with joy |
| गातु | शरीर | their bodies |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 81
- स्रोत अभिलेख
- 1.81
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 96, 96
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