बालकाण्ड · दोहा 63 · दोहा/सोरठा
सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।
सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।
सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध।।63।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.63 · पुस्तक पृ. 82, 83
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।
शिव का अपमान सहा नहीं जा रहा था और हृदय को समझाने से भी शांति नहीं मिल रही थी।
English explanation
The insult to Shiva could not be borne, and her heart could find no calm through reassurance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | शिव का | to Shiva |
| अपमानु | अपमान | insult |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | could be |
| सहि | सहा | endured |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| न | नहीं | not |
| होइ | होती | arose |
| प्रबोध | समझाने से शांति | calm through reassurance |
2 सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध।।63।।
तब सती ने दृढ़तापूर्वक पूरी सभा को डाँटते हुए क्रोधभरे वचन कहे।
English explanation
Then Sati firmly rebuked the entire assembly and spoke words filled with anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | समस्त | entire |
| सभहि | सभा को | the assembly |
| हठि | दृढ़तापूर्वक | firmly; insistently |
| हटकि | डाँटकर, फटकारकर | rebuking |
| तब | तब | then |
| बोलीं | बोलीं | she spoke |
| बचन | वचन | words |
| सक्रोध | क्रोध सहित | with anger |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 63
- स्रोत अभिलेख
- 1.63
- सहायक विषय
- सतीका दक्ष-यज्ञमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 82, 83
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।