बालकाण्ड · दोहा 64 · दोहा/सोरठा
सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।
सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।
जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्हि मुनीस।।64।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.64 · पुस्तक पृ. 83, 83
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।
सती की मृत्यु सुनकर शिव के गण यज्ञ को नष्ट करने लगे।
English explanation
Hearing of Sati’s death, Shiva’s attendants began destroying the sacrifice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सती | शिव की पत्नी सती की | of Sati, Shiva’s wife |
| मरनु | मृत्यु | death |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| संभु | शिव के | Shiva’s |
| गन | गण, अनुचर | attendants |
| लगे | लगे | began |
| करन | करने | to bring about |
| मख | यज्ञ का | of the sacrifice |
| खीस | विनाश | destruction |
2 जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्हि मुनीस।।64।।
यज्ञ का विध्वंस देखकर श्रेष्ठ मुनि भृगु ने उसकी रक्षा की।
English explanation
Seeing the destruction of the sacrifice, the eminent sage Bhrigu protected it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग्य | यज्ञ का | of the sacrifice |
| बिधंस | विध्वंस | destruction |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| भृगु | भृगु ऋषि ने | the sage Bhrigu |
| रच्छा | रक्षा | protection |
| कीन्हि | की | provided |
| मुनीस | श्रेष्ठ मुनि | eminent sage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 64
- स्रोत अभिलेख
- 1.64
- सहायक विषय
- पतिके अपमानसे दु:खी होकर सतीका योगाग्निसे जल जाना, दक्ष-यज्ञ-विध्वंस
- मुद्रित पृष्ठ
- 83, 83
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