बालकाण्ड · दोहा 62 · दोहा/सोरठा
कहि देखा हर जतन बहु रहइ न दच्छकुमारि।
कहि देखा हर जतन बहु रहइ न दच्छकुमारि।
दिए मुख्य गन संग तब बिदा कीन्ह त्रिपुरारि।।62।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.62 · पुस्तक पृ. 81, 82
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहि देखा हर जतन बहु रहइ न दच्छकुमारि।
शिव ने बहुत तरह से कहकर समझाने का प्रयत्न किया, पर दक्ष की पुत्री सती रुकी नहीं।
English explanation
Shiva tried many ways of persuading her, but Sati, Daksha’s daughter, would not stay.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर; समझाकर | by speaking; by counseling |
| देखा | प्रयास करके देखा | tried |
| हर | हर, शिव | Hara, Shiva |
| जतन | प्रयत्न; उपाय | efforts; means |
| बहु | बहुत | many |
| रहइ | रुकती; ठहरती | would stay |
| न | नहीं | not |
| दच्छकुमारि | दक्ष की पुत्री सती | Sati, Daksha’s daughter |
2 दिए मुख्य गन संग तब बिदा कीन्ह त्रिपुरारि।।62।।
तब त्रिपुर के संहारक शिव ने प्रमुख गणों को साथ देकर सती को विदा किया।
English explanation
Then Shiva, the destroyer of Tripura, sent Sati off with his chief attendants accompanying her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिए | दिए; साथ नियुक्त किए | provided; assigned |
| मुख्य | प्रमुख | chief |
| गन | शिव के गण; परिचारक | Shiva’s attendants |
| संग | साथ | to accompany her |
| तब | तब | then |
| बिदा | विदाई | departure; leave-taking |
| कीन्ह | की; विदा किया | performed; sent her off |
| त्रिपुरारि | त्रिपुर के शत्रु और संहारक शिव | Shiva, foe and destroyer of Tripura |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 62
- स्रोत अभिलेख
- 1.62
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 81, 82
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