बालकाण्ड · दोहा 61 · दोहा/सोरठा
पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ।
पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ।
तौ मै जाउँ कृपायतन सादर देखन सोइ।।61।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.61 · पुस्तक पृ. 80, 81
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ।
पिता के घर बड़ा उत्सव है; हे प्रभु, यदि आपकी अनुमति हो—
English explanation
There is a grand celebration at my father’s home; my lord, if you grant permission—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पिता | पिता के | my father’s |
| भवन | घर में | at the home |
| उत्सव | उत्सव | celebration |
| परम | बहुत बड़ा; महान | grand; great |
| जौं | यदि | if |
| प्रभु | हे स्वामी; शिव को संबोधन | my lord, addressing Shiva |
| आयसु | आपकी अनुमति | your permission |
| होइ | हो; मिले | is given |
2 तौ मै जाउँ कृपायतन सादर देखन सोइ।।61।।
तो हे कृपा के आश्रय, मैं आदरपूर्वक उस उत्सव को देखने जाऊँ।
English explanation
Then, O abode of compassion, may I go respectfully to see that celebration.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| मै | मैं | I |
| जाउँ | जाऊँ | may go |
| कृपायतन | हे कृपा के आश्रय; शिव को संबोधन | O abode of compassion, addressing Shiva |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| देखन | देखने के लिए | to see |
| सोइ | उसी उत्सव को | that very celebration |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 61
- स्रोत अभिलेख
- 1.61
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 80, 81
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