बालकाण्ड · दोहा 327 · दोहा
सहित बधूटिन्ह कुअँर सब तब आए पितु पास।
सहित बधूटिन्ह कुअँर सब तब आए पितु पास।
सोभा मंगल मोद भरि उमगेउ जनु जनवास॥ ३२७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.327 · पुस्तक पृ. 311, 312
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सहित बधूटिन्ह कुअँर सब तब आए पितु पास।
तब सभी कुमार अपनी वधुओं सहित पिता दशरथ के पास आए।
English explanation
Then all the princes came to their father Dasharatha with their brides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | साथ | with |
| बधूटिन्ह | वधुओं के | their brides |
| कुअँर | राजकुमार | princes |
| सब | सभी | all |
| तब | तब | then |
| आए | आए | came |
| पितु | पिता दशरथ के | their father Dasharatha |
| पास | पास | to |
2सोभा मंगल मोद भरि उमगेउ जनु जनवास॥ ३२७॥
जनवासा मानो शोभा, मंगल और आनंद से भरकर उमड़ उठा।
English explanation
The wedding party's lodging seemed to overflow with splendor, auspiciousness, and joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोभा | शोभा | splendor |
| मंगल | मंगल | auspiciousness |
| मोद | आनंद | joy |
| भरि | भरकर | filled with |
| उमगेउ | उमड़ उठा | overflowed |
| जनु | मानो | as though |
| जनवास | बारात का ठहरने का स्थान | the wedding party's lodging |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 327
- स्रोत अभिलेख
- 1.327
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 311, 312
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