बालकाण्ड · दोहा 95 · दोहा
समुझि महेस समाज सब जननि जनक मुसुकाहिं।
समुझि महेस समाज सब जननि जनक मुसुकाहिं।
बाल बुझाए बिबिध बिधि निडर होहु डरु नाहिं॥ ९५॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.95 · पुस्तक पृ. 109, 109
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1समुझि महेस समाज सब जननि जनक मुसुकाहिं।
एआई-प्रारूप अर्थ: यह शिव की मंडली है, समझकर सभी माता-पिता मुसकराते हैं।
English explanation
AI-draft meaning: Recognizing it as Shiva’s entourage, all the mothers and fathers smile.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | समझकर | recognizing |
| महेस | महेश, शिव की | of Mahesha, Shiva |
| समाज | मंडली | entourage |
| सब | सभी | all |
| जननि | माताएँ | mothers |
| जनक | पिता | fathers |
| मुसुकाहिं | मुसकराते हैं | smile |
2बाल बुझाए बिबिध बिधि निडर होहु डरु नाहिं॥ ९५॥
एआई-प्रारूप अर्थ: उन्होंने बच्चों को अनेक प्रकार से समझाया: ‘निडर हो जाओ; डरने की बात नहीं है।’
English explanation
AI-draft meaning: They reassured the children in various ways: ‘Be fearless; there is nothing to fear.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाल | बच्चों को | the children |
| बुझाए | समझाया; आश्वस्त किया | explained to; reassured |
| बिबिध | अनेक | various |
| बिधि | तरीकों से | in ways |
| निडर | निर्भय | fearless |
| होहु | हो जाओ | become; be |
| डरु | भय; डरने की बात | fear; cause for fear |
| नाहिं | नहीं है | there is none |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 95
- स्रोत अभिलेख
- 1.95
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 109, 109
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।