बालकाण्ड · दोहा 41 · दोहा/सोरठा
समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग।
समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग।
कलि अघ खल अवगुन कथन ते जलमल बग काग।।41।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.41 · पुस्तक पृ. 63, 64
भावार्थ और शब्दार्थ
1समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग।
भरत का चरित्र जप और यज्ञ के समान है, जो सभी असंख्य उत्पातों को शांत करता है।
English explanation
Bharata’s story is like sacred recitation and sacrifice, pacifying all the countless disturbances.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समन | शांत करने वाला | pacifying |
| अमित | असंख्य | countless |
| उतपात | उपद्रव, अनिष्ट | disturbances and calamities |
| सब | सभी | all |
| भरतचरित | भरत का चरित्र और आचरण | the story and conduct of Bharata, Rama’s brother |
| जपजाग | जप और यज्ञ | sacred recitation and sacrifice |
2 कलि अघ खल अवगुन कथन ते जलमल बग काग।।41।।
कलियुग के पापों और दुष्टों के अवगुणों का वर्णन इस नदी में जल का मैल, बगुले और कौए हैं।
English explanation
Accounts of the sins of the Kali age and the faults of wicked people are the river’s water impurities, herons, and crows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलि | कलियुग के | of the Kali age |
| अघ | पाप | sins |
| खल | दुष्टों के | of wicked people |
| अवगुन | दोष | faults |
| कथन | वर्णन | accounts |
| ते | वे | those |
| जलमल | जल का मैल | water impurities |
| बग | बगुले | herons |
| काग | कौए | crows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 41
- स्रोत अभिलेख
- 1.41
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 63, 64
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।