बालकाण्ड · दोहा 15 · दोहा/सोरठा
सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।
सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।
तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ।।15।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.15 · पुस्तक पृ. 37, 38
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।
यदि स्वप्न में भी या सचमुच मुझ पर शिव और गौरी की कृपा है—
English explanation
If Shiva and Gauri favor me, even in a dream or in reality—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| साचेहुँ | सचमुच भी | in reality too |
| मोहि | मुझ | me |
| पर | पर | upon |
| जौं | यदि | if |
| हर | शिव की | Shiva’s |
| गौरि | गौरी, पार्वती की | Gauri’s, Parvati’s |
| पसाउ | कृपा | grace |
2 तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ।।15।।
तो लोकभाषा में रची कविता के प्रभाव के बारे में मैंने जो कुछ कहा है, वह सब सत्य हो।
English explanation
Then may everything I have said about the efficacy of poetry in the vernacular prove true.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| फुर | सत्य | true |
| होउ | हो | may it be |
| जो | जो कुछ | whatever |
| कहेउँ | मैंने कहा है | I have said |
| सब | सब | all |
| भाषा | लोकभाषा में | in the vernacular |
| भनिति | काव्य-रचना का | of poetic composition |
| प्रभाउ | प्रभाव | efficacy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 15
- स्रोत अभिलेख
- 1.15
- सहायक विषय
- वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 37, 38
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