बालकाण्ड · दोहा 14 (छ) · दोहा/सोरठा
बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।
बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।
होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि।।14(छ)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।
देवताओं, ब्राह्मणों, विद्वानों और ग्रहों के चरणों की वंदना करके मैं हाथ जोड़कर कहता हूँ—
English explanation
Bowing to the feet of the gods, Brahmins, learned people, and planetary deities, I say with folded hands—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबुध | देवताओं के | of the gods |
| बिप्र | ब्राह्मणों के | of Brahmins |
| बुध | विद्वानों के | of learned people |
| ग्रह | ग्रह-देवताओं के | of planetary deities |
| चरन | चरण | feet |
| बंदि | वंदना करके | having bowed to |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having folded |
2 होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि।।14(छ)।।
प्रसन्न होकर मेरे सभी सुंदर मनोरथ पूरे करें।
English explanation
Be pleased and fulfill all my worthy aspirations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइ | होकर | being; becoming |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| पुरवहु | पूरा कीजिए | please fulfill |
| सकल | सभी | all |
| मंजु | सुंदर; शुभ | beautiful; worthy |
| मनोरथ | अभिलाषाएँ | aspirations |
| मोरि | मेरी | my |
| छ | पद्य-संदर्भ चिह्न (छ) | verse reference marker (छ) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14 (छ)
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
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