बालकाण्ड · दोहा 14 (च) · दोहा/सोरठा
बंदउँ बिधि पद रेनु भव सागर जेहि कीन्ह जहँ।
बंदउँ बिधि पद रेनु भव सागर जेहि कीन्ह जहँ।
संत सुधा ससि धेनु प्रगटे खल बिष बारुनी।।14(च)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
भावार्थ और शब्दार्थ
1 बंदउँ बिधि पद रेनु भव सागर जेहि कीन्ह जहँ।
मैं ब्रह्मा के चरणों की धूल को प्रणाम करता हूँ, जिन्होंने संसाररूपी समुद्र बनाया, जिसमें—
English explanation
I bow to the dust of Brahma’s feet; he created the ocean of worldly existence, in which—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| बिधि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के | of Brahma, the creator |
| पद | चरणों की | of the feet |
| रेनु | धूल | dust |
| भव | संसाररूपी | of worldly existence |
| सागर | समुद्र | ocean |
| जेहि | जिन्होंने | who |
| कीन्ह | बनाया | created |
| जहँ | जहाँ; जिसमें | where; in which |
2 संत सुधा ससि धेनु प्रगटे खल बिष बारुनी।।14(च)।।
संत अमृत, चंद्रमा और कामधेनु के समान, तथा दुष्ट विष और मदिरा के समान प्रकट हुए।
English explanation
The virtuous appeared like nectar, the moon, and the wish-giving cow, while the wicked appeared like poison and liquor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | सज्जन; संत | saints; virtuous people |
| सुधा | अमृत | nectar of immortality |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| धेनु | कामधेनु | the wish-giving celestial cow |
| प्रगटे | प्रकट हुए | appeared; emerged |
| खल | दुष्ट | wicked people |
| बिष | विष | poison |
| बारुनी | वारुणी मदिरा | Varuni liquor |
| च | पद्य-संदर्भ चिह्न (च) | verse reference marker (च) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14 (च)
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।