बालकाण्ड · दोहा 14 (ङ) · दोहा/सोरठा
बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस।
बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस।
जिन्हहि न सपनेहुँ खेद बरनत रघुबर बिसद जसु।।14(ङ)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस।
मैं चारों वेदों को प्रणाम करता हूँ, जो संसाररूपी समुद्र में जहाज के समान हैं।
English explanation
I bow to all four Vedas, which are like ships upon the ocean of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| चारिउ | चारों | all four |
| बेद | वेदों को | the Vedas |
| भव | संसाररूपी | of worldly existence |
| बारिधि | समुद्र | ocean |
| बोहित | जहाज | ship |
| सरिस | के समान | like |
2 जिन्हहि न सपनेहुँ खेद बरनत रघुबर बिसद जसु।।14(ङ)।।
रघुवर के निर्मल यश का वर्णन करते हुए जिन्हें स्वप्न में भी खेद नहीं होता।
English explanation
They feel no distress, even in dreams, while describing Rama’s spotless glory.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्हहि | जिन वेदों को | to which Vedas |
| न | नहीं | not |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in dreams |
| खेद | खेद; क्लेश | distress; regret |
| बरनत | वर्णन करते हुए | while describing |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम का | of Rama, finest of Raghu’s line |
| बिसद | निर्मल | spotless |
| जसु | यश | glory |
| ङ | पद्य-संदर्भ चिह्न (ङ) | verse reference marker (ङ) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14 (ङ)
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।