बालकाण्ड · दोहा 14 (घ) · दोहा/सोरठा
बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।
बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।
सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित।।14(घ)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
भावार्थ और शब्दार्थ
1 बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।
मैं उन मुनि वाल्मीकि के चरण-कमलों को प्रणाम करता हूँ जिन्होंने रामायण की रचना की—
English explanation
I bow to the lotus feet of the sage Valmiki, who composed the Ramayana—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| मुनि | वाल्मीकि मुनि के | of the sage Valmiki |
| पद | चरण | feet |
| कंजु | कमल-समान | lotus-like |
| रामायन | रामायण महाकाव्य | the epic Ramayana |
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| निरमयउ | रचना की | composed |
2 सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित।।14(घ)।।
वह रामायण खर के वर्णन सहित भी अत्यंत कोमल और सुंदर है, तथा दूषण के वर्णन सहित भी दोषरहित है।
English explanation
That Ramayana, though containing Khara, is delicate and beautiful, and though containing Dushana, is free from faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखर | खर राक्षस सहित | containing the demon Khara |
| सुकोमल | अत्यंत कोमल | very delicate |
| मंजु | सुंदर | beautiful |
| दोष | दोषों से | faults |
| रहित | रहित | free from |
| दूषन | दूषण राक्षस | the demon Dushana |
| सहित | सहित | containing |
| घ | पद्य-संदर्भ चिह्न (घ) | verse reference marker (घ) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14 (घ)
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
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