बालकाण्ड · दोहा 14 (ग) · दोहा/सोरठा
कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल।
कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल।
बाल बिनय सुनि सुरुचि लखि मोपर होहु कृपाल।।14(ग)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल।
हे कवियों और विद्वानों, आप रघुवर के चरित्ररूपी मानस सरोवर के सुंदर हंस हैं।
English explanation
O poets and scholars, you are graceful swans in the Manasa lake of Rama’s deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबि | हे कवियों | O poets |
| कोबिद | हे विद्वानों | O scholars |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम के | of Rama, finest of Raghu’s line |
| चरित | चरित्ररूपी | in the form of his deeds |
| मानस | मानस सरोवर | Lake Manasa |
| मंजु | सुंदर | graceful |
| मराल | हंस | swans |
2 बाल बिनय सुनि सुरुचि लखि मोपर होहु कृपाल।।14(ग)।।
इस बालक की विनती सुनकर और उसकी शुभ रुचि देखकर मुझ पर कृपालु हों।
English explanation
Hear this child’s plea, recognize his worthy inclination, and be gracious to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाल | इस बालक की | of this child |
| बिनय | विनती | plea |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुरुचि | अच्छी रुचि | worthy inclination |
| लखि | देखकर; पहचानकर | recognizing |
| मोपर | मुझ पर | toward me |
| होहु | होइए | please be |
| कृपाल | कृपालु | gracious |
| ग | पद्य-संदर्भ चिह्न (ग) | verse reference marker (ग) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14 (ग)
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
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