बालकाण्ड · दोहा 14 (ख) · दोहा/सोरठा
सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर।
सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर।
करहु कृपा हरि जस कहउँ पुनि पुनि करउँ निहोर।।14(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 35, 37
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर।
वह निर्मल बुद्धि के बिना नहीं होता, और मेरी बुद्धि का बल बहुत कम है।
English explanation
That cannot be achieved without a pure intellect, and my intellectual strength is very slight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| न | नहीं | not |
| होइ | होता | comes about |
| बिनु | बिना | without |
| बिमल | निर्मल | pure |
| मति | बुद्धि | intellect |
| मोहि | मेरे पास; मेरी | in my case; my |
| मति | बुद्धि का | of intellect |
| बल | बल | strength |
| अति | बहुत | very |
| थोर | कम | little |
2 करहु कृपा हरि जस कहउँ पुनि पुनि करउँ निहोर।।14(ख)।।
कृपा करें कि मैं हरि का यश कह सकूँ; मैं बार-बार विनती करता हूँ।
English explanation
Show grace so that I may recount Hari’s glory; I entreat you again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहु | कीजिए | please bestow |
| कृपा | कृपा | grace |
| हरि | भगवान हरि का | of Lord Hari |
| जस | यश | glory |
| कहउँ | मैं कह सकूँ | I may recount |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| करउँ | मैं करता हूँ | I make |
| निहोर | विनती | an entreaty |
| ख | पद्य-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- सहायक विषय
- कवि-वन्दना · वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 35, 37
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।