बालकाण्ड · दोहा 16 · दोहा/सोरठा
बंदउँ अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद।
बंदउँ अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद।
बिछुरत दीनदयाल प्रिय तनु तृन इव परिहरेउ।।16।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.16 · पुस्तक पृ. 38, 39
भावार्थ और शब्दार्थ
1बंदउँ अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद।
मैं अयोध्या के राजा दशरथ को प्रणाम करता हूँ, जिनका राम के चरणों में सच्चा प्रेम था।
English explanation
I bow to Dasharatha, king of Ayodhya, whose love for Rama’s feet was true.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| अवध | अयोध्या के | of Ayodhya |
| भुआल | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सत्य | सच्चा | true |
| प्रेम | प्रेम | love |
| जेहि | जिनका | whose |
| राम | राम के | Rama’s |
| पद | चरणों में | for the feet of |
2 बिछुरत दीनदयाल प्रिय तनु तृन इव परिहरेउ।।16।।
दीनों पर दया करने वाले राम से बिछुड़ते ही उन्होंने अपने प्रिय शरीर को तिनके के समान त्याग दिया।
English explanation
Upon separation from Rama, compassionate to the helpless, he cast off his cherished body as though it were a blade of grass.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिछुरत | बिछुड़ते ही | upon being separated from |
| दीनदयाल | दीनों पर दया करने वाले राम | Rama, compassionate to the helpless |
| प्रिय | प्रिय | cherished |
| तनु | शरीर | body |
| तृन | तिनके | a blade of grass |
| इव | के समान | like |
| परिहरेउ | त्याग दिया | cast off |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 16
- स्रोत अभिलेख
- 1.16
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 38, 39
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।