बालकाण्ड · दोहा 54 · दोहा/सोरठा
सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप।
सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप।
जेहिं जेहिं बेष अजादि सुर तेहि तेहि तन अनुरूप।।54।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.54 · पुस्तक पृ. 75, 75
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप।
उन्होंने असंख्य अनुपम सती, ब्रह्माणियाँ और लक्ष्मियाँ देखीं।
English explanation
She saw countless incomparable Satis, consorts of Brahma, and Lakshmis.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सती | सती स्वरूप देवियाँ; शिव की पत्नियाँ | Satis, consorts of Shiva |
| बिधात्री | ब्रह्माणी; ब्रह्मा की पत्नी | consorts of Brahma |
| इंदिरा | लक्ष्मी; विष्णु की पत्नी | Lakshmis, consorts of Vishnu |
| देखीं | देखीं | saw |
| अमित | असंख्य | countless |
| अनूप | अनुपम | incomparable |
2 जेहिं जेहिं बेष अजादि सुर तेहि तेहि तन अनुरूप।।54।।
ब्रह्मा आदि देवता जिस-जिस वेश में थे, उनकी देवियों के शरीर उसी-उसी के अनुरूप थे।
English explanation
Whatever forms Brahma and the other gods bore, their consorts’ bodies corresponded to those respective forms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिस | whichever |
| जेहिं | जिस; प्रत्येक संबंधित | each respective |
| बेष | वेश में | in form |
| अजादि | ब्रह्मा आदि | Brahma and others |
| सुर | देवता | gods |
| तेहि | उसी | that corresponding |
| तेहि | उसी; प्रत्येक संबंधित | each respective |
| तन | शरीर; रूप | bodies; forms |
| अनुरूप | अनुकूल; मेल खाते हुए | corresponding to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 54
- स्रोत अभिलेख
- 1.54
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 75, 75
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।