बालकाण्ड · दोहा 53 · दोहा/सोरठा
राम बचन मृदु गूढ़ सुनि उपजा अति संकोचु।
राम बचन मृदु गूढ़ सुनि उपजा अति संकोचु।
सती सभीत महेस पहिं चलीं हृदयँ बड़ सोचु।।53।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.53 · पुस्तक पृ. 74, 74
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम बचन मृदु गूढ़ सुनि उपजा अति संकोचु।
राम के कोमल किंतु गहरे आशय वाले वचन सुनकर सती को बहुत संकोच हुआ।
English explanation
Hearing Rama’s gentle yet deeply meaningful words, Sati felt great embarrassment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| बचन | वचन | words |
| मृदु | कोमल, मधुर | gentle |
| गूढ़ | गहरे, छिपे आशय वाले | having a deep, implicit meaning |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| अति | बहुत | great |
| संकोचु | संकोच, लज्जा | embarrassment |
2 सती सभीत महेस पहिं चलीं हृदयँ बड़ सोचु।।53।।
भयभीत सती शिव के पास चलीं; उनके हृदय में बड़ी चिंता थी।
English explanation
Frightened, Sati went toward Shiva, with great anxiety in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सती | सती, शिव की पत्नी | Sati, Shiva’s wife |
| सभीत | भयभीत | frightened |
| महेस | महेश, शिव | Shiva, the great Lord |
| पहिं | के पास, की ओर | toward, to |
| चलीं | चलीं | went |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| बड़ | बड़ी | great |
| सोचु | चिंता | anxiety |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 53
- स्रोत अभिलेख
- 1.53
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 74, 74
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