बालकाण्ड · दोहा 52 · दोहा/सोरठा
पुनि पुनि हृदयँ विचारु करि धरि सीता कर रुप।
पुनि पुनि हृदयँ विचारु करि धरि सीता कर रुप।
आगें होइ चलि पंथ तेहि जेहिं आवत नरभूप।।52।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.52 · पुस्तक पृ. 73, 74
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1पुनि पुनि हृदयँ विचारु करि धरि सीता कर रुप।
मन में बार-बार विचार करके सती ने सीता का रूप धारण किया।
English explanation
After reflecting repeatedly in her heart, Sati assumed Sita's form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| हृदयँ | हृदय में; मन में | in her heart; in her mind |
| विचारु | विचार | reflection |
| करि | करके | having done |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama's wife |
| कर | का | of; belonging to |
| रुप | रूप; स्वरूप | form; appearance |
2 आगें होइ चलि पंथ तेहि जेहिं आवत नरभूप।।52।।
वह आगे होकर उसी रास्ते पर चलीं जिस पर नरराज राम आ रहे थे।
English explanation
She went ahead and walked along the very path by which Rama, the king among men, was approaching.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगें | आगे | ahead |
| होइ | होकर | having positioned herself |
| चलि | चलीं | she walked; proceeded |
| पंथ | रास्ते पर | along the path |
| तेहि | उस | that |
| जेहिं | जिस पर; जिससे होकर | on which; by which |
| आवत | आ रहे थे | was approaching |
| नरभूप | मनुष्यों के राजा राम | Rama, king among men |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 52
- स्रोत अभिलेख
- 1.52
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 73, 74
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