बालकाण्ड · सोरठा 51 · सोरठा
लाग न उर उपदेसु जदपि कहेउ सिवँ बार बहु।
लाग न उर उपदेसु जदपि कहेउ सिवँ बार बहु।
बोले बिहसि महेसु हरिमाया बलु जानि जियँ॥ ५१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.51 · पुस्तक पृ. 72, 72
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1लाग न उर उपदेसु जदपि कहेउ सिवँ बार बहु।
एआई-प्रारूप: यद्यपि शिव ने बहुत बार समझाया, फिर भी सती के हृदय में उपदेश नहीं बैठा।
English explanation
AI draft: Although Shiva explained many times, the teaching did not take hold in Sati’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लाग | लगा; मन में बैठा | took hold; sank in |
| न | नहीं | not |
| उर | हृदय में | in the heart |
| उपदेसु | उपदेश; समझाइश | teaching; counsel |
| जदपि | यद्यपि | although |
| कहेउ | कहा; समझाया | said; explained |
| सिवँ | शिव ने | Shiva, as the speaker |
| बार | बार; अवसर | times; occasions |
| बहु | बहुत; अनेक | many |
2बोले बिहसि महेसु हरिमाया बलु जानि जियँ॥ ५१॥
एआई-प्रारूप: हरि की माया का बल मन में जानकर महेश मुस्कराते हुए बोले।
English explanation
AI draft: Recognizing within his heart the power of Hari’s maya, Shiva smiled and spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | spoke |
| बिहसि | मुस्कराकर | smiling |
| महेसु | महेश; शिव | Shiva, the great lord |
| हरिमाया | हरि की माया | Hari’s divine maya |
| बलु | बल; सामर्थ्य | power; potency |
| जानि | जानकर; पहचानकर | knowing; recognizing |
| जियँ | हृदय में; मन में | in his heart; inwardly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 51
- स्रोत अभिलेख
- 1.51
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 72, 72
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।