बालकाण्ड · दोहा 263 · दोहा/सोरठा
संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।
संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।
गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार।।263।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.263 · पुस्तक पृ. 254, 254
भावार्थ और शब्दार्थ
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1संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।
साथ में सुंदर और चतुर सखियाँ मंगलगीत गा रही हैं।
English explanation
Alongside her, beautiful and accomplished companions sing auspicious songs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संग | साथ में | alongside her |
| सखीं | सखियाँ | female companions |
| सुदंर | सुंदर | beautiful |
| चतुर | चतुर, निपुण | accomplished, skillful |
| गावहिं | गा रही हैं | are singing |
| मंगलचार | मंगल अवसर के गीत | auspicious ceremonial songs |
2 गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार।।263।।
सीता युवा हंस जैसी चाल से चलीं; उनके अंगों की सुंदरता अपार थी।
English explanation
Sita proceeded with the gait of a young swan; the beauty of her form was boundless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गवनी | चलीं | proceeded |
| बाल | युवा, छोटा | young |
| मराल | हंस | swan |
| गति | चाल से | with the gait of |
| सुषमा | सुंदरता, शोभा | beauty, grace |
| अंग | अंगों की | of her form |
| अपार | असीम | boundless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 263
- स्रोत अभिलेख
- 1.263
- सहायक विषय
- धनुषभंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 254, 254
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