बालकाण्ड · दोहा 262 · दोहा/सोरठा
बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर।
बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर।
करहिं निछावरि लोग सब हय गय धन मनि चीर।।262।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.262 · पुस्तक पृ. 253, 254
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर।
स्थिर बुद्धि वाले बंदी, मागध और सूतों के समूह यशगान करते हैं।
English explanation
The composed panegyrists, Magadha bards, and groups of heralds recite praises.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदी | प्रशस्ति गाने वाले बंदीजन | panegyrists |
| मागध | मागध, वंश और यश गाने वाले भाट | Magadha bards, reciters of lineage and glory |
| सूतगन | सूतों के समूह, वंशावली और यश के गायक | groups of heralds and genealogical bards |
| बिरुद | यश और प्रशस्ति | praises and glorious titles |
| बदहिं | कहते हैं; गाते हैं | recite; proclaim |
| मतिधीर | स्थिर और विवेकी बुद्धि वाले | composed and discerning |
2 करहिं निछावरि लोग सब हय गय धन मनि चीर।।262।।
सभी लोग घोड़े, हाथी, धन, मणियाँ और वस्त्र न्योछावर करते हैं।
English explanation
Everyone makes celebratory offerings of horses, elephants, wealth, jewels, and garments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | make |
| निछावरि | न्योछावर; उत्सव में अर्पण | celebratory offerings |
| लोग | लोग | people |
| सब | सभी | all |
| हय | घोड़े | horses |
| गय | हाथी | elephants |
| धन | धन | wealth |
| मनि | मणियाँ; रत्न | jewels |
| चीर | वस्त्र | garments |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 262
- स्रोत अभिलेख
- 1.262
- सहायक विषय
- धनुषभंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 253, 254
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