बालकाण्ड · दोहा 264 · दोहा/सोरठा
रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं सुमन।
रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं सुमन।
सकुचे सकल भुआल जनु बिलोकि रबि कुमुदगन।।264।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.264 · पुस्तक पृ. 255, 255
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं सुमन।
रघुकुल-श्रेष्ठ राम के वक्ष पर जयमाला देखकर देवता फूल बरसाते हैं।
English explanation
Seeing the victory garland on the chest of Rama, the foremost of Raghu’s line, the gods shower flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबर | रघुकुल के श्रेष्ठ राम के | of Rama, foremost of Raghu’s line |
| उर | वक्ष पर | on the chest |
| जयमाल | विजय की माला | the victory garland |
| देखि | देखकर | seeing |
| देव | देवता | the gods |
| बरिसहिं | बरसाते हैं | shower |
| सुमन | फूल | flowers |
2 सकुचे सकल भुआल जनु बिलोकि रबि कुमुदगन।।264।।
सभी राजा ऐसे संकुचित हो गए, जैसे सूर्य को देखकर कुमुदों का समूह सिमट जाता है।
English explanation
All the kings shrank in embarrassment, like night-blooming water lilies closing at the sight of the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकुचे | संकुचित हो गए | shrank in embarrassment |
| सकल | सभी | all |
| भुआल | राजा | kings |
| जनु | मानो | as though |
| बिलोकि | देखकर | upon seeing |
| रबि | सूर्य | the sun |
| कुमुदगन | कुमुदों का समूह | a multitude of night-blooming water lilies |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 264
- स्रोत अभिलेख
- 1.264
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 255, 255
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