बालकाण्ड · दोहा 39 · दोहा/सोरठा
श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल।
श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल।
संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूल।।39।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.39 · पुस्तक पृ. 61, 63
भावार्थ और शब्दार्थ
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1श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल।
श्रोताओं के तीन प्रकार के समुदाय इस नदी के दोनों तटों पर बसे पुर, गाँव और नगर हैं।
English explanation
The three kinds of listener communities are the settlements, villages, and towns on both banks of this river.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रोता | सुनने वालों के | of listeners |
| त्रिबिध | तीन प्रकार के | of three kinds |
| समाज | समुदाय | communities |
| पुर | बस्तियाँ; पुर | settlements |
| ग्राम | गाँव | villages |
| नगर | नगर | towns |
| दुहुँ | दोनों | both |
| कूल | तटों पर | on the banks |
2 संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूल।।39।।
संतों की सभा अनुपम अयोध्या है, जो समस्त शुभ मंगल का स्रोत है।
English explanation
The assembly of saints is the peerless Ayodhya, the source of all auspicious well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संतसभा | संतों की सभा | the assembly of saints |
| अनुपम | जिसकी कोई तुलना नहीं | peerless |
| अवध | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| सकल | समस्त | all |
| सुमंगल | शुभ मंगल का | of auspicious well-being |
| मूल | स्रोत | source |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 39
- स्रोत अभिलेख
- 1.39
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 61, 63
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