बालकाण्ड · दोहा 38 · दोहा/सोरठा
जे श्रद्धा संबल रहित नहि संतन्ह कर साथ।
जे श्रद्धा संबल रहित नहि संतन्ह कर साथ।
तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ।।38।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.38 · पुस्तक पृ. 61, 61
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जे श्रद्धा संबल रहित नहि संतन्ह कर साथ।
जो श्रद्धा के संबल से रहित हैं और जिन्हें संतों का साथ नहीं मिलता—
English explanation
Those who lack the sustaining provision of faith and have no companionship of saints—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| श्रद्धा | श्रद्धा के | of faith |
| संबल | सहारे, यात्रा की सामग्री से | support or journey provisions |
| रहित | विहीन हैं | are without |
| नहि | नहीं है | do not have |
| संतन्ह | संतों | saints |
| कर | का | of |
| साथ | साथ, संगति | companionship |
2 तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ।।38।।
उनके लिए, जिन्हें रघुनाथ प्रिय नहीं हैं, यह मानस-सरोवर अत्यंत अगम है।
English explanation
For those people, to whom Rama is not dear, this Manas lake is exceedingly inaccessible.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| कहुँ | के लिए | for |
| मानस | मानस-सरोवर | the Manas lake |
| अगम | पहुँच से परे | inaccessible |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| जिन्हहि | जिन्हें | to whom |
| न | नहीं | not |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 38
- स्रोत अभिलेख
- 1.38
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 61, 61
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