बालकाण्ड · दोहा 271 · दोहा/सोरठा
रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँमार।।
रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँमार।।
धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।271।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.271 · पुस्तक पृ. 260, 261
भावार्थ और शब्दार्थ
1रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँमार।।
अरे राजकुमार, काल के वश में होकर बोल रहे हो; तुम्हें अपनी वाणी की सुध नहीं है।
English explanation
You royal child! You speak under death’s sway, with no awareness of what you are saying.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रे | अरे | you there! |
| नृप | राजा का | royal |
| बालक | बालक; कुमार | child; young prince |
| कालबस | काल अथवा मृत्यु के वश में | under the sway of death |
| बोलत | बोल रहे हो | you are speaking |
| तोहि | तुम्हें | to you |
| न | नहीं | no |
| सँमार | सुध; अपने कहे का होश | awareness of what you say |
2 धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।271।।
क्या त्रिपुर के शत्रु शिव का धनुष छोटी धनुही के समान है? उसका महत्त्व सारे संसार में प्रसिद्ध है।
English explanation
Is the bow of Shiva, destroyer of Tripura, like a little bow? Its distinction is known throughout the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धनुही | छोटी धनुही | a little bow |
| सम | के समान | like |
| तिपुरारि | त्रिपुर के शत्रु शिव का | of Shiva, destroyer of Tripura |
| धनु | धनुष | bow |
| बिदित | प्रसिद्ध; ज्ञात | well known |
| सकल | सारे | the whole |
| संसार | संसार में | throughout the world |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 271
- स्रोत अभिलेख
- 1.271
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 260, 261
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।