बालकाण्ड · दोहा 219 · दोहा/सोरठा
रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस।
रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस।
नख सिख सुंदर बंधु दोउ सोभा सकल सुदेस।।219।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.219 · पुस्तक पृ. 216, 217
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस।
सुंदर सिरों पर मनोहर चौकोनी टोपियाँ थीं और बाल काले तथा घुँघराले थे।
English explanation
Attractive four-cornered caps adorned their handsome heads, and their hair was dark and curly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रुचिर | मनोहर | attractive |
| चौतनीं | चौकोनी टोपियाँ | four-cornered caps |
| सुभग | सुंदर | handsome |
| सिर | सिर | heads |
| मेचक | काले; गहरे रंग के | dark; black |
| कुंचित | घुँघराले | curly |
| केस | बाल | hair |
2 नख सिख सुंदर बंधु दोउ सोभा सकल सुदेस।।219।।
दोनों भाई नख से शिख तक सुंदर थे और समस्त शोभा के सुंदर निवास थे।
English explanation
Both brothers were beautiful from toe to crown, lovely abodes of all beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नख | पैर के नख से | from the toenails |
| सिख | सिर की चोटी तक | to the crown of the head |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| बंधु | भाई | brothers |
| दोउ | दोनों | both |
| सोभा | सुंदरता का | of beauty |
| सकल | समस्त | all |
| सुदेस | सुंदर निवास-स्थान | lovely abodes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 219
- स्रोत अभिलेख
- 1.219
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 216, 217
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