बालकाण्ड · दोहा 220 · दोहा/सोरठा
बय किसोर सुषमा सदन स्याम गौर सुख घाम।
बय किसोर सुषमा सदन स्याम गौर सुख घाम।
अंग अंग पर वारिअहिं कोटि कोटि सत काम।।220।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.22 · पुस्तक पृ. 217, 218
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बय किसोर सुषमा सदन स्याम गौर सुख घाम।
दोनों किशोर अवस्था के हैं, सुंदरता के निवास हैं; एक श्याम और दूसरा गौर है, और दोनों सुख के धाम हैं।
English explanation
The two are youthful, abodes of beauty; one is dark and the other fair, and both are abodes of joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बय | आयु में | in age |
| किसोर | किशोर | adolescent |
| सुषमा | सुंदरता के | of beauty |
| सदन | निवास | abodes |
| स्याम | श्याम वर्ण वाले राम | dark-complexioned Rama |
| गौर | गौर वर्ण वाले लक्ष्मण | fair-complexioned Lakshmana |
| सुख | सुख के | of joy |
| घाम | धाम, निवास | abodes |
2अंग अंग पर वारिअहिं कोटि कोटि सत काम।।220।।
उनके प्रत्येक अंग पर सैकड़ों करोड़ों कामदेव न्योछावर किए जा सकते हैं।
English explanation
Hundreds of millions upon millions of love-gods could be offered up for each limb of theirs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंग | अंग | limb |
| अंग | अंग—हर एक अंग | each limb |
| पर | पर | upon |
| वारिअहिं | न्योछावर किए जाएँ | could be offered up |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions |
| कोटि | करोड़ों और | upon tens of millions |
| सत | सैकड़ों | hundreds of |
| काम | कामदेव | love-gods |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 220
- स्रोत अभिलेख
- 1.22
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 217, 218
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।