बालकाण्ड · दोहा 21 · दोहा/सोरठा
राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार।
राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर।।21।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.21 · पुस्तक पृ. 43, 43
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार।
राम-नाम रूपी मणि का दीपक मुख के द्वार पर जीभ की देहरी पर रखो।
English explanation
Place the jewel-lamp of Rama’s name upon the tongue, the threshold at the doorway of the mouth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| नाम | नाम | name |
| मनिदीप | मणि का दीपक | a jewel-lamp |
| धरु | रखो | place; set |
| जीह | जीभ की | of the tongue |
| देहरी | देहरी पर | upon the threshold |
| द्वार | मुख के द्वार पर | at the mouth’s doorway |
2 तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर।।21।।
तुलसी कहते हैं: यदि तुम भीतर और बाहर भी उजाला चाहते हो, तो राम-नाम का वह दीपक रखो।
English explanation
Tulsi says: If you desire light both within and outside, place that lamp of Rama’s name there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| भीतर | अंदर | within |
| बाहेरहुँ | बाहर भी | outside as well |
| जौं | यदि | if |
| चाहसि | तुम चाहते हो | you desire |
| उजिआर | उजाला; प्रकाश | light; illumination |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 21
- स्रोत अभिलेख
- 1.21
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 43, 43
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।