बालकाण्ड · दोहा 22 · दोहा/सोरठा
सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।
सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।
नाम सुप्रेम पियूष हद तिन्हहुँ किए मन मीन।।22।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.22 · पुस्तक पृ. 43, 44
भावार्थ और शब्दार्थ
1सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।
जो सभी कामनाओं से रहित हैं और रामभक्ति के रस में लीन हैं—
English explanation
Those who are free from all desires and absorbed in the delight of devotion to Rama—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| कामना | इच्छाओं से | of desires |
| हीन | रहित | free |
| जे | जो | those who |
| राम | भगवान राम की | to Lord Rama |
| भगति | भक्ति के | of devotion |
| रस | आनंद में | in the delight |
| लीन | मग्न | absorbed |
2 नाम सुप्रेम पियूष हद तिन्हहुँ किए मन मीन।।22।।
उन्होंने भी नाम के प्रति गहरे प्रेम के अमृत-सरोवर में अपने मन को मछली बनाया है। ‘हद’ का अर्थ यहाँ सरोवर मानकर किया गया है।
English explanation
They too have made their minds fish in the nectar-lake of deep love for the name. Here ‘हद’ is interpreted as a lake, with a textual caveat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाम | रामनाम के प्रति | for Rama’s name |
| सुप्रेम | गहरा, सुंदर प्रेम | deep, beautiful love |
| पियूष | अमृत | nectar |
| हद | सरोवर | lake |
| तिन्हहुँ | उन्होंने भी | they too |
| किए | बनाया है | have made |
| मन | अपने मन को | their minds |
| मीन | मछली | fish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 22
- स्रोत अभिलेख
- 1.22
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 43, 44
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।