बालकाण्ड · दोहा 31 · दोहा/सोरठा
राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु।
राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु।
तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारु।।31।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.31 · पुस्तक पृ. 53, 54
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु।
रामकथा मंदाकिनी नदी है और सुंदर चित्त चित्रकूट है।
English explanation
Rama's story is the Mandakini River, and the lovely heart is Chitrakoot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कथा | कथा | story |
| मंदाकिनी | मंदाकिनी नदी | the Mandakini River |
| चित्रकूट | चित्रकूट, राम का वनवास-स्थल | Chitrakoot, Rama's forest abode |
| चित | चित्त | heart; mind |
| चारु | सुंदर | lovely |
2 तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारु।।31।।
तुलसीदास कहते हैं: सुंदर स्नेह वन है, जिसमें सीता और राम विहार करते हैं।
English explanation
Tulsidas says: lovely affection is the forest in which Sita and Rama roam.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| सुभग | सुंदर | lovely |
| सनेह | स्नेह | affection |
| बन | वन | forest |
| सिय | सीता | Sita, Rama's wife |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu's line |
| बिहारु | विहार | roaming; delightful sojourn |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 31
- स्रोत अभिलेख
- 1.31
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 53, 54
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