बालकाण्ड · दोहा 32 (क) · दोहा/सोरठा
कुपथ कुतरक कुचालि कलि कपट दंभ पाषंड।
कुपथ कुतरक कुचालि कलि कपट दंभ पाषंड।
दहन राम गुन ग्राम जिमि इंधन अनल प्रचंड।।32(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 54, 55
भावार्थ और शब्दार्थ
1कुपथ कुतरक कुचालि कलि कपट दंभ पाषंड।
कुमार्ग, कुतर्क, दुष्ट चालें, कलियुग की बुराइयाँ, कपट, दंभ और पाखंड—इन सबका दहन अगले चरण में वर्णित है।
English explanation
Wrong paths, fallacious reasoning, wicked conduct, the evils of the Kali age, deceit, pretension, and hypocrisy—these are what the following line describes as being burned away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुपथ | कुमार्ग | wrong paths |
| कुतरक | कुतर्क | fallacious reasoning |
| कुचालि | दुष्ट चाल या आचरण | wicked conduct or schemes |
| कलि | कलियुग की बुराइयाँ | evils of the Kali age |
| कपट | छल | deceit |
| दंभ | दिखावटी अहंकार | pretension |
| पाषंड | धार्मिक पाखंड | religious hypocrisy |
2 दहन राम गुन ग्राम जिमि इंधन अनल प्रचंड।।32(क)।।
राम के गुणों के समूह इन बुराइयों को वैसे जलाते हैं जैसे प्रचंड अग्नि ईंधन को जलाती है।
English explanation
The collections of Rama’s virtues burn these evils as a fierce fire burns fuel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दहन | जलाने वाले | burning away |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| ग्राम | समूह | collections |
| जिमि | जैसे | as |
| इंधन | ईंधन | fuel |
| अनल | अग्नि | fire |
| प्रचंड | प्रचंड | fierce |
| क | पद्य-संदर्भ चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 32 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 54, 55
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।