बालकाण्ड · दोहा 32 (ख) · दोहा/सोरठा
रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु।
रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु।
सज्जन कुमुद चकोर चित हित बिसेषि बड़ लाहु।।32(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 54, 55
भावार्थ और शब्दार्थ
1 रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु।
राम का चरित पूर्णिमा के चंद्रमा की किरणों के समान सबको सुख देने वाला है।
English explanation
Rama’s story, like the rays of the full moon, brings happiness to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामचरित | राम का चरित्र और कथा | Rama’s deeds and story |
| राकेस | पूर्णिमा का चंद्रमा | full moon |
| कर | किरणें | rays |
| सरिस | के समान | like |
| सुखद | सुख देने वाला | happiness-giving |
| सब | सभी | all |
| काहु | को | to everyone |
2 सज्जन कुमुद चकोर चित हित बिसेषि बड़ लाहु।।32(ख)।।
विशेषतः सज्जन रूपी कुमुदों और उनके चकोर रूपी चित्तों के लिए यह हितकारी और बड़ा लाभ है।
English explanation
It is especially beneficial and a great blessing to the virtuous, figured as night-blooming lotuses, and to their minds, figured as moon-loving chakora birds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सज्जन | सज्जन लोग | virtuous people |
| कुमुद | रात में खिलने वाले कमल | night-blooming lotuses |
| चकोर | चंद्रमा को चाहने वाला चकोर पक्षी | moon-loving chakora bird |
| चित | चित्त | mind |
| हित | हितकारी | beneficial |
| बिसेषि | विशेष रूप से | especially |
| बड़ | बड़ा | great |
| लाहु | लाभ | benefit |
| ख | पद्य-संदर्भ चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 32 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 54, 55
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।