बालकाण्ड · दोहा 33 · दोहा/सोरठा
राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार।
राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार।
सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल बिचार।।33।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.33 · पुस्तक पृ. 55, 56
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार।
राम अनंत हैं, उनके गुण अनंत हैं और उनकी कथा का विस्तार असीम है।
English explanation
Rama is infinite, his virtues are infinite, and the extent of his story is immeasurable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| अनंत | अनंत हैं | is infinite |
| अनंत | अनंत | infinite |
| गुन | गुण | virtues; qualities |
| अमित | असीम | immeasurable |
| कथा | कथा का | of the story |
| बिस्तार | विस्तार | extent |
2 सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल बिचार।।33।।
जिनके विचार निर्मल हैं, वे यह सुनकर आश्चर्य नहीं करेंगे।
English explanation
Those whose understanding is clear and pure will not be astonished on hearing this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| आचरजु | आश्चर्य | astonishment |
| न | नहीं | not |
| मानिहहिं | मानेंगे; अनुभव करेंगे | will feel |
| जिन्ह | जिन लोगों | those whose |
| कें | के | of |
| बिमल | निर्मल; शुद्ध | clear; pure |
| बिचार | विचार; विवेक | thought; understanding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 33
- स्रोत अभिलेख
- 1.33
- सहायक विषय
- मानसनिर्माणकी तिथि
- मुद्रित पृष्ठ
- 55, 56
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