बालकाण्ड · दोहा 34 · दोहा/सोरठा
मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर।
मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर।
जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर।।34।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.34 · पुस्तक पृ. 56, 57
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर।
सज्जनों के समूह सरयू के अत्यंत पवित्र जल में स्नान करते हैं।
English explanation
Groups of virtuous people bathe in the deeply sacred waters of the Sarayu.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मज्जहि | स्नान करते हैं | bathe |
| सज्जन | सज्जनों के | of virtuous people |
| बृंद | समूह | groups |
| बहु | अत्यंत | very |
| पावन | पवित्र | sacred and purifying |
| सरजू | सरयू नदी के | of the Sarayu River |
| नीर | जल में | in the waters |
2 जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर।।34।।
वे हृदय में राम के सुंदर श्याम शरीर का ध्यान धरकर उनका नाम जपते हैं।
English explanation
They repeat Rama’s name, holding his beautiful dark-hued form in meditation within their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जपहिं | जपते हैं | repeat in prayer |
| राम | राम का नाम | Rama’s name |
| धरि | धरकर | holding |
| ध्यान | ध्यान | meditative contemplation |
| उर | हृदय में | in the heart |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| स्याम | श्याम वर्ण के | dark-hued |
| सरीर | शरीर का | of the bodily form |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 34
- स्रोत अभिलेख
- 1.34
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 56, 57
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