बालकाण्ड · दोहा 35 · दोहा/सोरठा
जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।
जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।
अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु।।35।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 57, 58
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।
मानस जैसा है, जिस प्रकार उसकी रचना हुई और जिस कारण उसका जगत में प्रचार हुआ—
English explanation
What the Manas is like, how it came into being, and why it spread through the world—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जस | जैसा; जिस स्वरूप का | as it is; of what nature |
| मानस | रामचरितमानस | the narrative-lake of Rama’s deeds |
| जेहि | जिस | in which |
| बिधि | प्रकार | manner |
| भयउ | हुआ; उत्पन्न हुआ | came into being |
| जग | जगत में | in the world |
| प्रचार | प्रसार | dissemination |
| जेहि | जिस | for which |
| हेतु | कारण | reason |
2 अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु।।35।।
अब उमा और वृषध्वज शिव का स्मरण करके मैं वे सब प्रसंग कहता हूँ।
English explanation
Now, remembering Uma and Shiva, whose banner bears the bull, I recount all those circumstances.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सोइ | वही | those very |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I recount |
| प्रसंग | प्रसंग; संबंधित वृत्तांत | circumstances or episodes |
| सब | सभी | all |
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| उमा | उमा; पार्वती | Uma, or Parvati |
| बृषकेतु | वृषभ-चिह्नित ध्वजा वाले शिव | Shiva, whose banner bears a bull |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 35
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 57, 58
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