बालकाण्ड · दोहा 36 · दोहा/सोरठा
सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि।
सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि।
तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि।।36।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.36 · पुस्तक पृ. 58, 59
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि।
बुद्धिपूर्वक विचार करके अत्यंत सुंदर और श्रेष्ठ संवाद रचे गए हैं।
English explanation
Exceedingly beautiful and excellent dialogues have been composed with thoughtful deliberation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुठि | अत्यंत | exceedingly |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| संबाद | संवाद | dialogues |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| बिरचे | रचे गए | were composed |
| बुद्धि | बुद्धि से | with intelligence |
| बिचारि | विचार करके | after deliberation |
2 तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि।।36।।
वे ही इस पवित्र और सुंदर सरोवर के चार मनोहर घाट हैं।
English explanation
Those very dialogues are the four delightful bathing steps of this sacred, beautiful lake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेइ | वे ही | those very dialogues |
| एहि | इस | of this |
| पावन | पवित्र | sacred |
| सुभग | सुंदर; शोभायुक्त | beautiful |
| सर | सरोवर के | lake |
| घाट | जल तक उतरने के घाट | bathing steps leading to the water |
| मनोहर | मनोहर | delightful |
| चारि | चार | four |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 36
- स्रोत अभिलेख
- 1.36
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 58, 59
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