बालकाण्ड · दोहा 112 · दोहा/सोरठा
रामकृपा तें पारबति सपनेहुँ तव मन माहिं।
रामकृपा तें पारबति सपनेहुँ तव मन माहिं।
सोक मोह संदेह भ्रम मम बिचार कछु नाहिं।।112।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.112 · पुस्तक पृ. 125, 125
भावार्थ और शब्दार्थ
1रामकृपा तें पारबति सपनेहुँ तव मन माहिं।
हे पार्वती, राम की कृपा से तुम्हारे मन में स्वप्न में भी—अगली पंक्ति में वर्णित शोक आदि नहीं हैं।
English explanation
O Parvati, through Rama's grace, even in dreams your mind contains none of the sorrow and other troubles named in the following line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामकृपा | राम की कृपा | Rama's grace |
| तें | से; के कारण | through; because of |
| पारबति | हे पार्वती | O Parvati |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in dreams |
| तव | तुम्हारे | your |
| मन | मन | mind |
| माहिं | में | in |
2 सोक मोह संदेह भ्रम मम बिचार कछु नाहिं।।112।।
मेरे विचार में, तुम्हारे मन में शोक, मोह, संदेह और भ्रम तनिक भी नहीं हैं।
English explanation
In my judgment, there is not the slightest sorrow, delusion, doubt, or confusion in your mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक; दुःख | sorrow; grief |
| मोह | मोह; विवेक को ढकने वाला लगाव | delusion; clouding attachment |
| संदेह | संशय | doubt |
| भ्रम | भ्रम; गलत धारणा | confusion; mistaken perception |
| मम | मेरे | my |
| बिचार | विचार में; समझ के अनुसार | in the judgment of; in the view of |
| कछु | कुछ भी; तनिक भी | any at all; the slightest |
| नाहिं | नहीं है | there is none |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 112
- स्रोत अभिलेख
- 1.112
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 125, 125
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।