बालकाण्ड · दोहा 111 · दोहा/सोरठा
मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह।
मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह।
रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह।।111।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.111 · पुस्तक पृ. 124, 125
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह।
दो दंड तक ध्यान के रस में मग्न रहकर शिव ने फिर मन को ध्यान से बाहर किया।
English explanation
After remaining absorbed in the delight of meditation for two dandas, Shiva brought his mind outward again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मगन | मग्न रहे | remained absorbed |
| ध्यानरस | ध्यान के आनंद में | in the delight of meditation |
| दंड | दंड, समय की एक इकाई | danda, a unit of time |
| जुग | दो; एक जोड़ी | two; a pair |
| पुनि | फिर | then; again |
| मन | मन को | the mind |
| बाहेर | बाहर; ध्यान से बाहर | outward; out of meditation |
| कीन्ह | किया | brought; made |
2 रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह।।111।।
तब महेश प्रसन्न होकर रघुपति राम के चरित का वर्णन करने लगे।
English explanation
Then Shiva joyfully began to recount the deeds of Rama, lord of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | राम के, रघुवंश के स्वामी के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| चरित | चरित; जीवन और कर्म | deeds and life story |
| महेस | महेश, शिव | Shiva, the great Lord |
| तब | तब | then |
| हरषित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| बरनै | वर्णन करने | to recount |
| लीन्ह | लगे; आरंभ किया | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 111
- स्रोत अभिलेख
- 1.111
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 124, 125
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