बालकाण्ड · दोहा 110 · दोहा/सोरठा
बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।
बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।
प्रजा सहित रघुबंसमनि किमि गवने निज धाम।।110।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 123, 124
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।
फिर, हे करुणा के धाम, राम ने जो अद्भुत कार्य किया, वह कहिए।
English explanation
Then, O abode of compassion, recount the wondrous deed Rama performed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| कहहु | कहिए | recount |
| करुनायतन | हे करुणा के धाम शिव | O Shiva, abode of compassion |
| कीन्ह | किया | performed |
| जो | जो | which |
| अचरज | अद्भुत कार्य | wondrous deed |
| राम | राम ने | Rama |
2 प्रजा सहित रघुबंसमनि किमि गवने निज धाम।।110।।
रघुवंश के मणि राम अपनी प्रजा सहित अपने धाम कैसे गए?
English explanation
How did Rama, the jewel of Raghu’s lineage, depart to his own abode together with his people?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रजा | प्रजा | his people |
| सहित | के साथ | together with |
| रघुबंसमनि | रघुवंश के मणि राम | Rama, jewel of Raghu’s lineage |
| किमि | कैसे | how |
| गवने | गए; प्रस्थान किया | departed |
| निज | अपने | his own |
| धाम | धाम; दिव्य निवास | abode; divine dwelling |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 110
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 123, 124
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