बालकाण्ड · दोहा 109 · दोहा/सोरठा
बंदउ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि।
बंदउ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि।
बरनहु रघुबर बिसद जसु श्रुति सिद्धांत निचोरि।।109।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.109 · पुस्तक पृ. 122, 123
भावार्थ और शब्दार्थ
1बंदउ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि।
धरती पर सिर रखकर आपके चरणों की वंदना करती हूँ और हाथ जोड़कर विनती करती हूँ।
English explanation
Placing my head on the ground, I bow to your feet and make my plea with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउ | मैं वंदना करती हूँ | I bow reverently |
| पद | आपके चरणों की | to your feet |
| धरि | रखकर | placing |
| धरनि | धरती पर | on the ground |
| सिरु | सिर | my head |
| बिनय | विनती | a plea |
| करउँ | मैं करती हूँ | I make |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | folding together |
2 बरनहु रघुबर बिसद जसु श्रुति सिद्धांत निचोरि।।109।।
वेदों के सिद्धांतों का सार निकालकर रघुकुलश्रेष्ठ राम के निर्मल यश का वर्णन कीजिए।
English explanation
Drawing out the essence of the Vedas’ teachings, describe the pure glory of Rama, the foremost of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनहु | वर्णन कीजिए | please describe |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम का | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बिसद | निर्मल; उज्ज्वल | pure; radiant |
| जसु | यश | glory |
| श्रुति | वेदों के | of the Vedas |
| सिद्धांत | निश्चित तत्त्वों; सिद्धांतों को | settled teachings |
| निचोरि | सार निकालकर | drawing out the essence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 109
- स्रोत अभिलेख
- 1.109
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 122, 123
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।