बालकाण्ड · दोहा 113 · दोहा/सोरठा
रामकथा सुरधेनु सम सेवत सब सुख दानि।
रामकथा सुरधेनु सम सेवत सब सुख दानि।
सतसमाज सुरलोक सब को न सुनै अस जानि।।113।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.113 · पुस्तक पृ. 126, 126
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रामकथा सुरधेनु सम सेवत सब सुख दानि।
रामकथा कामधेनु के समान है; उसका सेवन करने पर वह सब सुख देती है।
English explanation
The story of Rama is like the wish-fulfilling divine cow: when attended to, it bestows every happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामकथा | राम की कथा | the story of Rama |
| सुरधेनु | कामधेनु, इच्छापूर्ति करने वाली दिव्य गाय | the wish-fulfilling divine cow |
| सम | के समान | like |
| सेवत | सेवन करने पर | when attended to |
| सब | सभी | all |
| सुख | सुख | happiness |
| दानि | देने वाली | bestowing |
2 सतसमाज सुरलोक सब को न सुनै अस जानि।।113।।
संतों का समाज ही देवलोक है; यह सब जानकर कौन रामकथा नहीं सुनेगा?
English explanation
The fellowship of saints is the heavenly realm; knowing all this, who would not listen to Rama’s story?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतसमाज | संतों का समाज | the fellowship of saints |
| सुरलोक | देवलोक | the heavenly realm of the gods |
| सब | यह सब | all this |
| को | कौन | who |
| न | नहीं | not |
| सुनै | सुनेगा | would listen |
| अस | ऐसा | thus |
| जानि | जानकर | knowing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 113
- स्रोत अभिलेख
- 1.113
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 126, 126
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