बालकाण्ड · दोहा 114 · दोहा/सोरठा
कहहि सुनहि अस अधम नर ग्रसे जे मोह पिसाच।
कहहि सुनहि अस अधम नर ग्रसे जे मोह पिसाच।
पाषंडी हरि पद बिमुख जानहिं झूठ न साच।।114।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.114 · पुस्तक पृ. 126, 127
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहहि सुनहि अस अधम नर ग्रसे जे मोह पिसाच।
ऐसी बात वे अधम मनुष्य कहते और सुनते हैं, जिन्हें मोहरूपी पिशाच ने ग्रस लिया है।
English explanation
Such things are spoken and heard by base people whom the demon of delusion has engulfed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहि | कहते हैं | say |
| सुनहि | सुनते हैं | hear |
| अस | ऐसी बात | such things |
| अधम | अधम, नीच | base |
| नर | मनुष्य | people |
| ग्रसे | ग्रस लिए गए | have been engulfed |
| जे | जो, जिन्हें | who; whom |
| मोह | मोहरूपी | delusion, pictured as |
| पिसाच | पिशाच | a demon |
2 पाषंडी हरि पद बिमुख जानहिं झूठ न साच।।114।।
वे पाखंडी और हरि के चरणों से विमुख हैं; वे उसे झूठ समझते हैं, सत्य नहीं।
English explanation
They are hypocrites, turned away from Hari’s feet; they regard it as false, not true.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाषंडी | पाखंडी | hypocrites |
| हरि | भगवान हरि के | of Hari, the Lord |
| पद | चरणों से | from the feet |
| बिमुख | विमुख, मुँह मोड़े हुए | turned away |
| जानहिं | समझते हैं | regard as |
| झूठ | झूठ | false |
| न | नहीं | not |
| साच | सत्य | true |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 114
- स्रोत अभिलेख
- 1.114
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 126, 127
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