बालकाण्ड · दोहा 115 · दोहा/सोरठा
अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय भजु राम पद।
अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय भजु राम पद।
सुनु गिरिराज कुमारि भ्रम तम रबि कर बचन मम।।115।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.115 · पुस्तक पृ. 127, 128
भावार्थ और शब्दार्थ
1अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय भजु राम पद।
अपने हृदय में ऐसा विचार करके संदेह छोड़ो और राम के चरणों का भजन करो।
English explanation
Reflecting thus in your own heart, abandon doubt and worship Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा; इस प्रकार | thus |
| निज | अपने | your own |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| तजु | छोड़ो | abandon |
| संसय | संदेह | doubt |
| भजु | भजन करो; आराधना करो | worship |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
2 सुनु गिरिराज कुमारि भ्रम तम रबि कर बचन मम।।115।।
हे पर्वतराज की पुत्री पार्वती, सुनो: मेरे वचन भ्रम के अंधकार के लिए सूर्य की किरणों के समान हैं।
English explanation
Listen, Parvati, daughter of the mountain king: my words are like rays of the sun dispelling the darkness of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| गिरिराज | पर्वतराज हिमालय की | of Himalaya, king of mountains |
| कुमारि | हे पुत्री पार्वती | O daughter, Parvati |
| भ्रम | भ्रम का | of delusion |
| तम | अंधकार | darkness |
| रबि | सूर्य की | of the sun |
| कर | किरणें | rays |
| बचन | वचन | words |
| मम | मेरे | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 115
- स्रोत अभिलेख
- 1.115
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 127, 128
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।